श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 14: द्रौपदीपुत्र श्रुतकर्मा और प्रतिविन्ध्यद्वारा क्रमश: चित्रसेन एवं चित्रका वध, कौरव-सेनाका पलायन तथा अश्वत्थामाका भीमसेनपर आक्रमण  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  8.14.23 
तत: शक्तिं महाराज स्वर्णघण्टां दुरासदाम्।
प्राहिणोत् तव पौत्राय घोरामग्निशिखामिव॥ २३॥
 
 
अनुवाद
महाराज! तत्पश्चात् उस चित्र ने आपके पौत्र पर प्रचण्ड अग्निशिखा के समान स्वर्ण घंटियों से विभूषित एक भयंकर शक्ति छोड़ी। 23॥
 
Maharaj! Thereafter, the picture fired a ferocious force decorated with golden bells like a crest of fierce fire on your grandson. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)