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mahabharat 8.14.21: तब चित्र ने तीक्ष्ण धार वाले तथा मोर और शंख के पंखों से युक्त स्वर्ण पंख वाले नौ बाणों से प्रतिविन्ध्य की दोनों भुजाओं और छाती पर गहरे घाव किये।   |   mahabharat अध्याय 8.14: द्रौपदीपुत्र श्रुतकर्मा और प्रतिविन्ध्यद्वारा क्रमश: चित्रसेन एवं चित्रका वध, कौरव-सेनाका पलायन तथा अश्वत्थामाका भीमसेनपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 14: द्रौपदीपुत्र श्रुतकर्मा और प्रतिविन्ध्यद्वारा क्रमश: चित्रसेन एवं चित्रका वध, कौरव-सेनाका पलायन तथा अश्वत्थामाका भीमसेनपर आक्रमण  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  8.14.21 
तं चित्रो नवभिर्भल्लैर्बाह्वोरुरसि चार्पयत्।
स्वर्णपुङ्खै: प्रसन्नाग्रै: कङ्कबर्हिणवाजितै:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तब चित्र ने तीक्ष्ण धार वाले तथा मोर और शंख के पंखों से युक्त स्वर्ण पंख वाले नौ बाणों से प्रतिविन्ध्य की दोनों भुजाओं और छाती पर गहरे घाव किये।
 
Then Chitra inflicted deep wounds on Prativindhya's both arms and chest with nine arrows having sharp edges and golden feathers fitted with feathers of a peacock and a conch.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)