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mahabharat 8.14.19: शत्रुओं पर विजय का उत्साह त्यागकर भागते हुए उन सैनिकों को देखकर, अपने तीखे बाणों द्वारा उन्हें भगाते हुए श्रुतकर्मा अत्यंत शोभायमान हो रहे थे ॥19॥   |   mahabharat अध्याय 8.14: द्रौपदीपुत्र श्रुतकर्मा और प्रतिविन्ध्यद्वारा क्रमश: चित्रसेन एवं चित्रका वध, कौरव-सेनाका पलायन तथा अश्वत्थामाका भीमसेनपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 14: द्रौपदीपुत्र श्रुतकर्मा और प्रतिविन्ध्यद्वारा क्रमश: चित्रसेन एवं चित्रका वध, कौरव-सेनाका पलायन तथा अश्वत्थामाका भीमसेनपर आक्रमण  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  8.14.19 
तांस्तु विद्रवतो दृष्ट्वा निरुत्साहान् द्विषज्जये।
द्रावयन्निषुभिस्तीक्ष्णै: श्रुतकर्मा व्यरोचत॥ १९॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं पर विजय का उत्साह त्यागकर भागते हुए उन सैनिकों को देखकर, अपने तीखे बाणों द्वारा उन्हें भगाते हुए श्रुतकर्मा अत्यंत शोभायमान हो रहे थे ॥19॥
 
Seeing those soldiers fleeing after giving up the excitement of victory over their enemies, Shrutakarma looked extremely beautiful as he chased them away with his sharp arrows. ॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)