श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 14: द्रौपदीपुत्र श्रुतकर्मा और प्रतिविन्ध्यद्वारा क्रमश: चित्रसेन एवं चित्रका वध, कौरव-सेनाका पलायन तथा अश्वत्थामाका भीमसेनपर आक्रमण  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  8.14.13 
अथैनं छिन्नधन्वानं नाराचानां शतैस्त्रिभि:।
छादयन् समरे राजन् विव्याध च सुपत्रिभि:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
महाराज! धनुष कट जाने पर श्रुतकर्मा ने चित्रसेन को आच्छादित कर दिया और उसे तीन सौ सुन्दर पंखयुक्त बाणों से घायल कर दिया।
 
Maharaj! After the bow was cut, Shrutakarma covered Chitrasena and wounded him with three hundred beautiful winged arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)