श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 14: द्रौपदीपुत्र श्रुतकर्मा और प्रतिविन्ध्यद्वारा क्रमश: चित्रसेन एवं चित्रका वध, कौरव-सेनाका पलायन तथा अश्वत्थामाका भीमसेनपर आक्रमण  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  8.14.11 
तत: स रुधिराक्ताङ्गो रुधिरेण कृतच्छवि:।
रराज समरे वीर: सपुष्प इव किंशुक:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् रक्त से भीगा हुआ वीर श्रुतकर्मा रक्त के कारण नवीन शोभा पाकर युद्धस्थल में प्रकट हुआ और पुष्पित पलाश वृक्ष के समान सुशोभित हो रहा था। 11.
 
Thereafter, the brave Shrutakarma, his body soaked in blood, appeared in the battlefield with a new beauty due to the blood and looked decorated like a blooming Palaash tree. 11.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)