श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 14: द्रौपदीपुत्र श्रुतकर्मा और प्रतिविन्ध्यद्वारा क्रमश: चित्रसेन एवं चित्रका वध, कौरव-सेनाका पलायन तथा अश्वत्थामाका भीमसेनपर आक्रमण  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  8.14.10 
श्रुतकर्मापि समरे नाराचेन समर्पित:।
सुस्राव रुधिरं तत्र गैरिकार्द्र इवाचल:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उस समय बाण से घायल होकर श्रुतकर्मा युद्धस्थल में रक्त बहाने लगे, जैसे गेरू से भीगा हुआ पर्वत लाल जल की धारा बहाता है॥10॥
 
At that time, Shrutakarma, wounded by the arrow, began to shed blood in the battle-field, just as a mountain drenched in ochre sheds a stream of red water.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)