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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 13: दोनों सेनाओंका परस्पर घोर युद्ध तथा सात्यकिके द्वारा विन्द और अनुविन्दका वध  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  8.13.5 
वध्यमाने बले तस्मिन् सूतपुत्रेण मारिष।
नकुलोऽभ्यद्रवत् तूर्णं सूतपुत्रं महारणे॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे महाराज! जब उस महायुद्ध में सारथिपुत्र के द्वारा उनकी सेना मारी जाने लगी, तब नकुल ने तुरन्त ही कर्ण पर आक्रमण कर दिया।
 
Honorable King! When his army started getting killed in that great war by the son of a charioteer, Nakul immediately attacked Karna. 5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)