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mahabharat 8.13.36-37h: विन्द का वध करके रथियों में श्रेष्ठ और शत्रुघ्न का संहार करने वाले वीर सात्यकि तुरन्त युधिष्ठिर के रथ पर चढ़ गये।   |   mahabharat अध्याय 8.13: दोनों सेनाओंका परस्पर घोर युद्ध तथा सात्यकिके द्वारा विन्द और अनुविन्दका वध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 13: दोनों सेनाओंका परस्पर घोर युद्ध तथा सात्यकिके द्वारा विन्द और अनुविन्दका वध  »  श्लोक 36-37h
 
 
श्लोक  8.13.36-37h 
तं निहत्य रणे शूर: शैनेयो रथसत्तम:॥ ३६॥
युधामन्युरथं तूर्णमारुरोह परंतप:।
 
 
अनुवाद
विन्द का वध करके रथियों में श्रेष्ठ और शत्रुघ्न का संहार करने वाले वीर सात्यकि तुरन्त युधिष्ठिर के रथ पर चढ़ गये।
 
After killing Vind, the brave Satyaki, the best of charioteers and the destroyer of Shatruga, immediately boarded Yudhishthira's chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)