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mahabharat 8.13.32-33h: फिर वे एक-दूसरे को मारने का प्रयत्न करने लगे। तत्पश्चात् सात्यकि ने विन्दकी की ढाल के दो टुकड़े कर दिए। इसी प्रकार राजकुमार विन्दने ने भी सात्यकि की ढाल के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। 32 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.13: दोनों सेनाओंका परस्पर घोर युद्ध तथा सात्यकिके द्वारा विन्द और अनुविन्दका वध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 13: दोनों सेनाओंका परस्पर घोर युद्ध तथा सात्यकिके द्वारा विन्द और अनुविन्दका वध  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  8.13.32-33h 
अन्योन्यस्य वधे चैव चक्रतुर्यत्नमुत्तमम्।
कैकेयस्य द्विधा चर्म ततश्चिच्छेद सात्वत:॥ ३२॥
सात्यकेस्तु तथैवासौ चर्म चिच्छेद पार्थिव:।
 
 
अनुवाद
फिर वे एक-दूसरे को मारने का प्रयत्न करने लगे। तत्पश्चात् सात्यकि ने विन्दकी की ढाल के दो टुकड़े कर दिए। इसी प्रकार राजकुमार विन्दने ने भी सात्यकि की ढाल के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। 32 1/2॥
 
Then they started trying hard to kill each other. Thereafter, Satyaki broke Vindaki's shield into two pieces. Similarly, Prince Vindane also broke Satyaki's shield in pieces. 32 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)