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mahabharat 8.13.26: राजन! उन बाणों से युद्ध करते समय महाबली सात्यकि के समस्त अंग क्षत-विक्षत होकर रक्त से लथपथ हो गये और वे खिले हुए पलाश के समान शोभायमान हो गये।   |   mahabharat अध्याय 8.13: दोनों सेनाओंका परस्पर घोर युद्ध तथा सात्यकिके द्वारा विन्द और अनुविन्दका वध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 13: दोनों सेनाओंका परस्पर घोर युद्ध तथा सात्यकिके द्वारा विन्द और अनुविन्दका वध  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  8.13.26 
स शरै: क्षतसर्वाङ्ग: सात्यकि: सत्यविक्रम:।
रराज समरे राजन् सपुष्प इव किंशुक:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
राजन! उन बाणों से युद्ध करते समय महाबली सात्यकि के समस्त अंग क्षत-विक्षत होकर रक्त से लथपथ हो गये और वे खिले हुए पलाश के समान शोभायमान हो गये।
 
Rajan! In the battle with those arrows, all the organs of the mighty Satyaki got mutilated and bled and he became beautiful like a blooming palasha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)