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mahabharat 8.13.24: शिला पर तीखे हुए साठ स्वर्ण पंखयुक्त बाणों से सात्यकि को घायल करके उसने जोर से गर्जना की और कहा, "खड़ा रहो, खड़ा रहो।" 24.   |   mahabharat अध्याय 8.13: दोनों सेनाओंका परस्पर घोर युद्ध तथा सात्यकिके द्वारा विन्द और अनुविन्दका वध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 13: दोनों सेनाओंका परस्पर घोर युद्ध तथा सात्यकिके द्वारा विन्द और अनुविन्दका वध  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  8.13.24 
स षष्टॺा सात्यकिं विद्‍ध्वा स्वर्णपुङ्खै: शिलाशितै:।
ननाद बलवन्नादं तिष्ठ तिष्ठेति चाब्रवीत्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
शिला पर तीखे हुए साठ स्वर्ण पंखयुक्त बाणों से सात्यकि को घायल करके उसने जोर से गर्जना की और कहा, "खड़ा रहो, खड़ा रहो।" 24.
 
Having wounded Satyaki with sixty golden-feathered arrows sharpened on a rock, he roared loudly and said, "Stand, stand." 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)