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mahabharat 8.13.20-21h: महाराज! तब युद्धोन्मादी सात्यकि क्रोधित हो उठे। उन्होंने युद्धभूमि में दूसरा धनुष लिया, उस पर प्रत्यंचा चढ़ाई और एक तीक्ष्ण छुरे से अनुविन्द का सिर काट डाला।   |   mahabharat अध्याय 8.13: दोनों सेनाओंका परस्पर घोर युद्ध तथा सात्यकिके द्वारा विन्द और अनुविन्दका वध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 13: दोनों सेनाओंका परस्पर घोर युद्ध तथा सात्यकिके द्वारा विन्द और अनुविन्दका वध  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  8.13.20-21h 
तत: क्रुद्धो महाराज सात्वतो युद्धदुर्मद:।
धनुरन्यत् समादाय सज्यं कृत्वा च संयुगे॥ २०॥
क्षुरप्रेण सुतीक्ष्णेन अनुविन्दशिरोऽहरत्।
 
 
अनुवाद
महाराज! तब युद्धोन्मादी सात्यकि क्रोधित हो उठे। उन्होंने युद्धभूमि में दूसरा धनुष लिया, उस पर प्रत्यंचा चढ़ाई और एक तीक्ष्ण छुरे से अनुविन्द का सिर काट डाला।
 
Maharaj! Then the war-monger Satyaki became furious. He took another bow on the battlefield, strung it and cut off Anuvinda's head with a very sharp razor.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)