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mahabharat 8.13.17: तत्पश्चात् वे दोनों भाई अन्य विचित्र धनुष और उत्तम बाण लेकर सात्यकि को ढकते हुए शोभायमान और वेगपूर्वक सब दिशाओं में चलने लगे॥17॥   |   mahabharat अध्याय 8.13: दोनों सेनाओंका परस्पर घोर युद्ध तथा सात्यकिके द्वारा विन्द और अनुविन्दका वध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 13: दोनों सेनाओंका परस्पर घोर युद्ध तथा सात्यकिके द्वारा विन्द और अनुविन्दका वध  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  8.13.17 
अथान्ये धनुषी चित्रे प्रगृह्य च महाशरान्।
सात्यकिं छादयन्तौ तौ चेरतुर्लघु सुष्ठु च॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वे दोनों भाई अन्य विचित्र धनुष और उत्तम बाण लेकर सात्यकि को ढकते हुए शोभायमान और वेगपूर्वक सब दिशाओं में चलने लगे॥17॥
 
Then the two brothers, taking other strange bows and excellent arrows, began to move in all directions gracefully and swiftly, covering Satyaki.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)