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mahabharat 8.13.15: सात्यकि के बाणों की वर्षा से रुककर उन दोनों राजकुमारों ने तुरन्त ही उसके रथ को बाणों से ढक दिया ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 8.13: दोनों सेनाओंका परस्पर घोर युद्ध तथा सात्यकिके द्वारा विन्द और अनुविन्दका वध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 13: दोनों सेनाओंका परस्पर घोर युद्ध तथा सात्यकिके द्वारा विन्द और अनुविन्दका वध  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  8.13.15 
वार्यमाणौ ततस्तौ हि शैनेयशरवृष्टिभि:।
शैनेयस्य रथं तूर्णं छादयामासतु: शरै:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
सात्यकि के बाणों की वर्षा से रुककर उन दोनों राजकुमारों ने तुरन्त ही उसके रथ को बाणों से ढक दिया ॥15॥
 
Being stopped by Satyaki's shower of arrows, those two princes immediately covered his chariot with arrows. ॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)