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mahabharat 8.13.14: महाराज! हे भरतपुत्र! सात्यकि ने हँसते हुए अपने बाणों की वर्षा से सम्पूर्ण दिशाओं को आच्छादित कर दिया और उन दोनों भाइयों को रोक दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.13: दोनों सेनाओंका परस्पर घोर युद्ध तथा सात्यकिके द्वारा विन्द और अनुविन्दका वध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 13: दोनों सेनाओंका परस्पर घोर युद्ध तथा सात्यकिके द्वारा विन्द और अनुविन्दका वध  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  8.13.14 
तौ सात्यकिर्महाराज प्रहसन् सर्वतोदिश:।
छादयञ्छरवर्षेण वारयामास भारत॥ १४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! हे भरतपुत्र! सात्यकि ने हँसते हुए अपने बाणों की वर्षा से सम्पूर्ण दिशाओं को आच्छादित कर दिया और उन दोनों भाइयों को रोक दिया।
 
Maharaj! O son of Bharat! Satyaki smilingly covered all directions with a shower of his arrows and stopped those two brothers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)