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mahabharat 8.12.45: हे भरतश्रेष्ठ! जैसे वज्र से घायल हुआ सिंह वज्र से खंडित पर्वत के पास गिरता है, उसी प्रकार क्षेमधुरि उस हाथी के पास गिर रहे थे। कुलीन कुलों की कीर्ति बढ़ाने वाले राजा क्षेमधुरि को मारा गया देखकर आपकी सेना व्याकुल होकर भागने लगी। 45।   |   mahabharat अध्याय 8.12: दोनों सेनाओंका घोर युद्ध और भीमसेनके द्वारा क्षेमधूर्तिका वध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 12: दोनों सेनाओंका घोर युद्ध और भीमसेनके द्वारा क्षेमधूर्तिका वध  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  8.12.45 
वज्रप्रभग्नमचलं सिंहो वज्रहतो यथा।
तं हतं नृपतिं दृष्ट्वा कुलूतानां यशस्करम्।
प्राद्रवद् व्यथिता सेना त्वदीया भरतर्षभ॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! जैसे वज्र से घायल हुआ सिंह वज्र से खंडित पर्वत के पास गिरता है, उसी प्रकार क्षेमधुरि उस हाथी के पास गिर रहे थे। कुलीन कुलों की कीर्ति बढ़ाने वाले राजा क्षेमधुरि को मारा गया देखकर आपकी सेना व्याकुल होकर भागने लगी। 45।
 
O best of the Bharatas! Just as a lion struck by thunderbolts falls near a mountain shattered by a thunderbolt, similarly Kshemadhuri was falling near that elephant. Seeing that King Kshemadhuri, who had increased the glory of the noble families, was killed, your army became distressed and started running away. 45.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)