श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 12: दोनों सेनाओंका घोर युद्ध और भीमसेनके द्वारा क्षेमधूर्तिका वध  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  8.12.41 
तत: क्रुद्धो रणे भीमं क्षेमधूर्ति: पराभिनत्।
जघान चास्य द्विरदं नाराचै: सर्वमर्मसु॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
तब क्षेमधूर्ति ने क्रोधित होकर युद्धभूमि में भीमसेन को बहुत घायल कर दिया तथा उसके हाथी के सभी महत्वपूर्ण स्थानों पर अनेक बाणों से प्रहार किया।
 
Then Kshemadhurti became furious and wounded Bhimasena deeply on the battlefield and struck his elephant in all its vital spots with many arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)