Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.12.17-18: महाराज! उन सभी सैनिकों ने मृत्यु को गले लगाने और एक-दूसरे का साथ न छोड़ने की एक जैसी प्रतिज्ञा की थी। उनके सिर पर मोर पंख थे। उनके हाथों में धनुष सुशोभित थे। उनके बाल बहुत लंबे थे और वे मीठी वाणी बोलते थे। अन्य पैदल और घुड़सवार भी बहुत वीर और भयानक थे। 17-18। | mahabharat अध्याय 8.12: दोनों सेनाओंका घोर युद्ध और भीमसेनके द्वारा क्षेमधूर्तिका वध । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महाराज! उन सभी सैनिकों ने मृत्यु को गले लगाने और एक-दूसरे का साथ न छोड़ने की एक जैसी प्रतिज्ञा की थी। उनके सिर पर मोर पंख थे। उनके हाथों में धनुष सुशोभित थे। उनके बाल बहुत लंबे थे और वे मीठी वाणी बोलते थे। अन्य पैदल और घुड़सवार भी बहुत वीर और भयानक थे। 17-18।
King! All those soldiers had taken a similar vow to embrace death and never left each other. They wore peacock feathers on their heads. Bows adorned their hands. Their hair was very long and they spoke sweet words. Other infantry and horsemen were also very brave and terrifying. 17-18.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥