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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 11: कर्णके सेनापतित्वमें कौरव-सेनाका युद्धके लिये प्रस्थान और मकरव्यूहका निर्माण तथा पाण्डव-सेनाके अर्धचन्द्राकार व्यूहकी रचना और युद्धका आरम्भ  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  8.11.40 
उभे सैन्ये महाराज प्रहृष्टनरसंकुले।
योद्धुकामे स्थिते राजन् हन्तुमन्योन्यमोजसा॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! दोनों सेनाएँ प्रसन्नचित्त लोगों से भरी हुई थीं। वे एक-दूसरे पर बलपूर्वक आक्रमण करने और युद्ध करने की इच्छा से युद्धभूमि में आकर खड़े हो गए।
 
Maharaj! Both the armies were full of people who were happy. King! They came and stood in the battlefield with the desire to attack each other forcefully and fight. 40.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)