श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 11: कर्णके सेनापतित्वमें कौरव-सेनाका युद्धके लिये प्रस्थान और मकरव्यूहका निर्माण तथा पाण्डव-सेनाके अर्धचन्द्राकार व्यूहकी रचना और युद्धका आरम्भ  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  8.11.39 
न द्रोणव्यसनं कश्चिज्जानीते तत्र भारत।
दृष्ट्वा कर्णं महेष्वासं मुखे व्यूहस्य दंशितम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
भरत! सेना के मुख्य द्वार पर कवच पहने खड़े महाधनुर्धर कर्ण को देखकर किसी भी सैनिक को द्रोणाचार्य के मारे जाने का दुःख नहीं हुआ।
 
Bharata! Seeing the great archer Karna standing at the main gate of the formation wearing armour, no soldier could experience the sorrow of Dronacharya being killed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)