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श्लोक 8.11.3  |
संजय उवाच
कर्णस्य मतमाज्ञाय पुत्रास्ते भरतर्षभ।
योगमाज्ञापयामासुर्नन्दितूर्यपुर:सरम्॥ ३॥ |
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| अनुवाद |
| संजय ने कहा- भरतश्रेष्ठ! कर्ण की बात सुनकर आपके पुत्रों ने सेना को हर्षोल्लासपूर्ण वाद्यों के साथ तैयार होने का आदेश दिया॥3॥ |
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| Sanjay said- Bharatshrestha! Hearing Karna's opinion, your sons ordered the army to get ready with joyful musical instruments. 3॥ |
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