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mahabharat 8.11.29-30: भीमसेन उस सेना के बाईं ओर खड़े थे और महाधनुर्धर धृष्टद्युम्न दाहिनी ओर। राजा युधिष्ठिर और पांडवपुत्र धनंजय मध्य में खड़े थे। नकुल और सहदेव धर्मराज के पीछे थे।   |   mahabharat अध्याय 8.11: कर्णके सेनापतित्वमें कौरव-सेनाका युद्धके लिये प्रस्थान और मकरव्यूहका निर्माण तथा पाण्डव-सेनाके अर्धचन्द्राकार व्यूहकी रचना और युद्धका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 11: कर्णके सेनापतित्वमें कौरव-सेनाका युद्धके लिये प्रस्थान और मकरव्यूहका निर्माण तथा पाण्डव-सेनाके अर्धचन्द्राकार व्यूहकी रचना और युद्धका आरम्भ  »  श्लोक 29-30
 
 
श्लोक  8.11.29-30 
वामपार्श्वे तु तस्याथ भीमसेनो व्यवस्थित:।
दक्षिणे च महेष्वासो धृष्टद्युम्नो व्यवस्थित:॥ २९॥
मध्ये व्यूहस्य राजा तु पाण्डवश्च धनंजय:।
नकुल: सहदेवश्च धर्मराजस्य पृष्ठत:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन उस सेना के बाईं ओर खड़े थे और महाधनुर्धर धृष्टद्युम्न दाहिनी ओर। राजा युधिष्ठिर और पांडवपुत्र धनंजय मध्य में खड़े थे। नकुल और सहदेव धर्मराज के पीछे थे।
 
Bhimsena stood on the left side of that formation and the great archer Dhrishtadyumna stood on the right side. King Yudhishthira and Pandava's son Dhananjay stood in the middle. Nakula and Sahadeva were at the back of Dharmaraja.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)