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mahabharat 8.11.10: हे राजन! कर्ण स्वर्ण-जाली से सुसज्जित शंख बजा रहा था और सोने से मण्डित विशाल धनुष को टंकार रहा था।   |   mahabharat अध्याय 8.11: कर्णके सेनापतित्वमें कौरव-सेनाका युद्धके लिये प्रस्थान और मकरव्यूहका निर्माण तथा पाण्डव-सेनाके अर्धचन्द्राकार व्यूहकी रचना और युद्धका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 11: कर्णके सेनापतित्वमें कौरव-सेनाका युद्धके लिये प्रस्थान और मकरव्यूहका निर्माण तथा पाण्डव-सेनाके अर्धचन्द्राकार व्यूहकी रचना और युद्धका आरम्भ  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  8.11.10 
ध्मापयन् वारिजं राजन् हेमजालविभूषितम्।
विधुन्वानो महच्चापं कार्तस्वरविभूषितम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! कर्ण स्वर्ण-जाली से सुसज्जित शंख बजा रहा था और सोने से मण्डित विशाल धनुष को टंकार रहा था।
 
O King! Karna was blowing his conch decorated with golden lattices and twanging his huge bow decorated with gold.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)