Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.10.8-9: उस समय राजा दुर्योधन ने उन महाधनुर्धर राजाओं को अत्यन्त मधुर एवं सुखदायक वचनों में सम्बोधित करते हुए यह समयानुकूल बात कही - 'हे बुद्धिमानों में भी बुद्धिमान्! आप सब लोग बिना विलम्ब किए शीघ्रतापूर्वक बताइए कि इस स्थिति में हमें क्या करना चाहिए तथा सबसे उत्तम कर्तव्य क्या है?'॥8-9॥ | mahabharat अध्याय 8.10: कर्णको सेनापति बनानेके लिये अश्वत्थामाका प्रस्ताव और सेनापतिके पदपर उसका अभिषेक । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततो दुर्योधनो राजा साम्ना परमवल्गुना।
तानाभाष्य महेष्वासान् प्राप्तकालमभाषत॥ ८॥
मतं मतिमतां श्रेष्ठा: सर्वे प्रब्रूत मा चिरम्।
एवं गते तु किं कार्यं किं च कार्यतरं नृपा:॥ ९॥
अनुवाद
उस समय राजा दुर्योधन ने उन महाधनुर्धर राजाओं को अत्यन्त मधुर एवं सुखदायक वचनों में सम्बोधित करते हुए यह समयानुकूल बात कही - 'हे बुद्धिमानों में भी बुद्धिमान्! आप सब लोग बिना विलम्ब किए शीघ्रतापूर्वक बताइए कि इस स्थिति में हमें क्या करना चाहिए तथा सबसे उत्तम कर्तव्य क्या है?'॥8-9॥
At that time, King Duryodhana addressed those great archer kings in very sweet and soothing words and said the following timely thing - 'O wisest of the wisest kings! All of you please speak quickly, without delay, what should we do in this situation and what is the most important duty?'॥ 8-9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥