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mahabharat 8.10.48: राजेन्द्र! इस प्रकार अभिषेक-विधि सम्पन्न होने पर शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले राधापुत्र कर्ण को स्वर्ण मुद्राएँ, गौएँ और धन देकर श्रेष्ठ ब्राह्मणों से स्वस्तिकवाचन करवाया।   |   mahabharat अध्याय 8.10: कर्णको सेनापति बनानेके लिये अश्वत्थामाका प्रस्ताव और सेनापतिके पदपर उसका अभिषेक   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 10: कर्णको सेनापति बनानेके लिये अश्वत्थामाका प्रस्ताव और सेनापतिके पदपर उसका अभिषेक  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  8.10.48 
ततोऽभिषिक्ते राजेन्द्र निष्कैर्गोभिर्धनेन च।
वाचयामास विप्राग्रॺान् राधेय: परवीरहा॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! इस प्रकार अभिषेक-विधि सम्पन्न होने पर शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले राधापुत्र कर्ण को स्वर्ण मुद्राएँ, गौएँ और धन देकर श्रेष्ठ ब्राह्मणों से स्वस्तिकवाचन करवाया।
 
Rajendra! In this way, after the consecration ceremony was completed, Radha's son Karna, who killed the enemy warriors, gave him gold coins, cows and money and got the best Brahmins to recite Swastika.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)