श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 10: कर्णको सेनापति बनानेके लिये अश्वत्थामाका प्रस्ताव और सेनापतिके पदपर उसका अभिषेक  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  8.10.42 
संजय उवाच
एवमुक्तो महाराज ततो दुर्योधनो नृप:।
उत्तस्थौ राजभि: सार्धं देवैरिव शतक्रतु:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - महाराज! कर्ण की यह बात सुनकर राजा दुर्योधन अन्य सामन्तों के साथ उसी प्रकार उठ खड़ा हुआ, जैसे इन्द्र देवताओं के साथ खड़े होते हैं।
 
Sanjaya says - Maharaj! On hearing Karna say this, King Duryodhana stood up with the other feudal kings in the same manner as Indra stands with the gods.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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