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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 10: कर्णको सेनापति बनानेके लिये अश्वत्थामाका प्रस्ताव और सेनापतिके पदपर उसका अभिषेक  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  8.10.3 
तमवस्थितमाज्ञाय पुत्रस्ते भरतर्षभ।
विद्रुतं स्वबलं दृष्ट्वा पौरुषेण न्यवारयत्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
यह जानते हुए कि वह युद्ध के लिए तैयार है, आपके पुत्र ने अपनी सेना को भागते हुए देखकर उसे वीरतापूर्वक रोक दिया।
 
Knowing that he was ready for battle, your son, seeing his army fleeing, stopped it valiantly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)