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mahabharat 8.10.29: मेरा मानना ​​है कि उन्होंने भी कुन्ती के पुत्रों को अपना शिष्य मानकर उनकी रक्षा की थी।' उस वृद्ध गुरु को भी शीघ्र ही धृष्टद्युम्न ने मार डाला।   |   mahabharat अध्याय 8.10: कर्णको सेनापति बनानेके लिये अश्वत्थामाका प्रस्ताव और सेनापतिके पदपर उसका अभिषेक   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 10: कर्णको सेनापति बनानेके लिये अश्वत्थामाका प्रस्ताव और सेनापतिके पदपर उसका अभिषेक  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  8.10.29 
तेनापि रक्षिता: पार्था: शिष्यत्वादिति मे मति:।
स चापि निहतो वृद्धो धृष्टद्युम्नेन सत्वरम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
मेरा मानना ​​है कि उन्होंने भी कुन्ती के पुत्रों को अपना शिष्य मानकर उनकी रक्षा की थी।' उस वृद्ध गुरु को भी शीघ्र ही धृष्टद्युम्न ने मार डाला।
 
‘I believe that he too protected Kunti's sons considering them to be his disciples. That old teacher too was soon killed by Dhrishtadyumna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)