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mahabharat 8.10.23: वीर! मेरी बात सुनकर अपनी इच्छानुसार जो चाहो करो। तुम बहुत बुद्धिमान हो और सदा मेरे सबसे बड़े आधार भी हो॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 8.10: कर्णको सेनापति बनानेके लिये अश्वत्थामाका प्रस्ताव और सेनापतिके पदपर उसका अभिषेक   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  8.10.23 
श्रुत्वा यथेष्टं च कुरु वीर यत् तव रोचते।
भवान् प्राज्ञतमो नित्यं मम चैव परा गति:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
वीर! मेरी बात सुनकर अपनी इच्छानुसार जो चाहो करो। तुम बहुत बुद्धिमान हो और सदा मेरे सबसे बड़े आधार भी हो॥ 23॥
 
Veer! After listening to me, do whatever you like according to your wish. You are very intelligent and you are also my biggest support forever.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)