श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 10: कर्णको सेनापति बनानेके लिये अश्वत्थामाका प्रस्ताव और सेनापतिके पदपर उसका अभिषेक  »  श्लोक 13-14
 
 
श्लोक  8.10.13-14 
लोकप्रवीरा येऽस्माकं देवकल्पा महारथा:॥ १३॥
नीतिमन्तस्तथा युक्ता दक्षा रक्ताश्च ते हता:।
न त्वेव कार्यं नैराश्यमस्माभिर्विजयं प्रति॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हमारे पक्ष के जो योद्धा देवताओं के समान वीर, विश्वविख्यात योद्धा, धर्मात्मा, साधन संपन्न, योग्य और स्वामीभक्त थे, वे सब मारे गए। फिर भी हमें अपनी विजय की आशा नहीं छोड़नी चाहिए॥13-14॥
 
On our side, those warriors who were as brave as the gods, world-renowned warriors, virtuous, resourceful, capable and devoted to their master, all of them were killed. However, we should not lose hope in our victory.॥ 13-14॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas