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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 10: कर्णको सेनापति बनानेके लिये अश्वत्थामाका प्रस्ताव और सेनापतिके पदपर उसका अभिषेक  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  8.10.1-2 
संजय उवाच
हते द्रोणे महेष्वासे तस्मिन्नहनि भारत।
कृते च मोघसंकल्पे द्रोणपुत्रे महारथे॥ १॥
द्रवमाणे महाराज कौरवाणां बलार्णवे।
व्यूह्य पार्थ: स्वकं सैन्यमतिष्ठद् भ्रातृभिर्वृत:॥ २॥
 
 
अनुवाद
संजय बोले, "हे भरतपुत्र! जिस दिन महान धनुर्धर द्रोणाचार्य मारे गये, महारथी द्रोणपुत्र का संकल्प निष्फल हो गया और समुद्र के समान विशाल कौरव सेना भागने लगी, उस समय कुंतीपुत्र अर्जुन सेना व्यूह बनाकर अपने भाइयों के साथ युद्धभूमि में डटे रहे।
 
Sanjaya said, "O son of Bharata! On that day when the great archer Dronacharya was killed, the resolve of the great warrior Drona's son became futile and the Kaurava army, as huge as the ocean, started fleeing, at that time Arjuna, the son of Kunti, formed an army formation and stood firm on the battlefield along with his brothers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)