Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.1.2: आसक्ति के कारण उसका बल और उत्साह लगभग लुप्त हो गया था। उसे बार-बार द्रोणाचार्य की चिंता हो रही थी और वह शोक से व्याकुल होकर कृपीपुत्र अश्वत्थामा के पास बैठ गया। | mahabharat अध्याय 8.1: कर्णवधका संक्षिप्त वृत्तान्त सुनकर जनमेजयका वैशम्पायनजीसे उसे विस्तारपूर्वक कहनेका अनुरोध । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ते द्रोणमनुशोचन्त: कश्मलाभिहतौजस:।
पर्युपासन्त शोकार्तास्तत: शारद्वतीसुतम्॥ २॥
अनुवाद
आसक्ति के कारण उसका बल और उत्साह लगभग लुप्त हो गया था। उसे बार-बार द्रोणाचार्य की चिंता हो रही थी और वह शोक से व्याकुल होकर कृपीपुत्र अश्वत्थामा के पास बैठ गया।
Due to attachment, his strength and enthusiasm had almost vanished. He was worried about Dronacharya again and again and was overcome with grief and sat around Kripi's son Ashwatthama.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥