श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 99: अर्जुनके द्वारा तीव्र गतिसे कौरव-सेनामें प्रवेश, विन्द और अनुविन्दका वध तथा अद्भुत जलाशयका निर्माण  »  श्लोक d1-2
 
 
श्लोक  7.99.d1-2 
संजय उवाच
(वर्तमाने तदा युद्धे द्रोणस्य सह पाण्डुभि:॥)
विवर्तमाने त्वादित्ये तत्रास्तशिखरं प्रति।
रजसा कीर्यमाणे च मन्दीभूते दिवाकरे॥ १॥
तिष्ठतां युध्यमानानां पुनरावर्ततामपि।
भज्यतां जयतां चैव जगाम तदह: शनै:॥ २॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! जब द्रोणाचार्य पाण्डवों के साथ युद्ध कर रहे थे और सूर्य क्षितिज की ओर डूब गया था, तब धूल से आच्छादित होने के कारण सूर्य की किरणें मंद दिखाई दे रही थीं। कुछ योद्धा खड़े थे, कुछ युद्ध कर रहे थे, कुछ भागकर वापस आ रहे थे और कुछ विजयी हो रहे थे। इस प्रकार उन सभी के लिए दिन धीरे-धीरे बीत रहा था॥1-2॥
 
Sanjaya says - O King! When Dronacharya was fighting with the Pandavas and the Sun had set towards the horizon, the rays of the Sun were appearing dim due to being covered by dust. Some of the warriors were standing, some were fighting, some were running away and returning back and some were emerging victorious. Thus the day was passing slowly for all of them.॥1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)