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mahabharat 7.99.9: अर्जुन अपने रथ पर बैठे हुए, अपने सामने एक कोस की दूरी तक बाण चलाते थे। जब तक वे बाण उनके शत्रुओं को मारते, तब तक उनका रथ एक कोस आगे बढ़ जाता था।   |   mahabharat अध्याय 7.99: अर्जुनके द्वारा तीव्र गतिसे कौरव-सेनामें प्रवेश, विन्द और अनुविन्दका वध तथा अद्भुत जलाशयका निर्माण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 99: अर्जुनके द्वारा तीव्र गतिसे कौरव-सेनामें प्रवेश, विन्द और अनुविन्दका वध तथा अद्भुत जलाशयका निर्माण  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.99.9 
रथस्थितोऽग्रत: क्रोशं यानस्यत्यर्जुन: शरान्।
रथे क्रोशमतिक्रान्ते तस्य ते घ्नन्ति शात्रवान्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन अपने रथ पर बैठे हुए, अपने सामने एक कोस की दूरी तक बाण चलाते थे। जब तक वे बाण उनके शत्रुओं को मारते, तब तक उनका रथ एक कोस आगे बढ़ जाता था।
 
Arjuna, seated on his chariot, would throw arrows up to a distance of one kos in front of him. By the time those arrows killed his enemies, his chariot would move one kos further ahead.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)