श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 99: अर्जुनके द्वारा तीव्र गतिसे कौरव-सेनामें प्रवेश, विन्द और अनुविन्दका वध तथा अद्भुत जलाशयका निर्माण  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  7.99.63 
तत: प्रहस्य गोविन्द: साधु साध्वित्यथाब्रवीत्।
शरवेश्मनि पार्थेन कृते तस्मिन् महात्मना॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
महाबली अर्जुन द्वारा बाणों का विशाल भवन निर्मित हो जाने पर भगवान श्रीकृष्ण हँसकर बोले - 'शाबाश अर्जुन, शाबाश' ॥63॥
 
After the great house of arrows was built by the great Arjun, Lord Krishna laughed and said - 'Well done Arjun, well done'. 63॥
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि विन्दानुविन्दवधे अर्जुनसरोनिर्माणे च एकोनशततमोऽध्याय:॥ ९९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें विन्द और अनुविन्दका वध तथा अर्जुनके द्वारा जलाशयका निर्माणविषयक निन्यानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९९॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके १ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ६४ १/२ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)