महाबली अर्जुन द्वारा बाणों का विशाल भवन निर्मित हो जाने पर भगवान श्रीकृष्ण हँसकर बोले - 'शाबाश अर्जुन, शाबाश' ॥63॥
After the great house of arrows was built by the great Arjun, Lord Krishna laughed and said - 'Well done Arjun, well done'. 63॥
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि विन्दानुविन्दवधे अर्जुनसरोनिर्माणे च एकोनशततमोऽध्याय:॥ ९९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें विन्द और अनुविन्दका वध तथा अर्जुनके द्वारा जलाशयका निर्माणविषयक निन्यानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९९॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके १ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ६४ १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥