vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 99: अर्जुनके द्वारा तीव्र गतिसे कौरव-सेनामें प्रवेश, विन्द और अनुविन्दका वध तथा अद्भुत जलाशयका निर्माण
»
श्लोक 56
श्लोक
7.99.56
स पार्थ: पार्थिवान् सर्वान् भूमिस्थोऽपि रथस्थितान्।
एको निवारयामास लोभ: सर्वगुणानिव॥ ५६॥
अनुवाद
पृथ्वी पर अकेले खड़े होकर अर्जुन ने रथों पर बैठे हुए पृथ्वी के समस्त राजाओं को उसी प्रकार रोक दिया, जैसे लोभ समस्त पुण्यों का नाश कर देता है ॥56॥
Standing alone on the earth, Arjuna stopped all the kings of the earth sitting on their chariots, just as greed destroys all virtues. ॥ 56॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×