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श्लोक  7.99.5 
यत्र यत्र रथो याति पाण्डवस्य महात्मन:।
तत्र तत्रैव दीर्यन्ते सेनास्तव विशाम्पते॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! अर्जुनपुत्र महाबली पाण्डवों का रथ जहाँ-जहाँ जाता था, वहाँ-वहाँ आपकी सेना में दरारें पड़ जाती थीं।
 
O Prajanath! Wherever the chariot of the great Pandava son of Arjuna went, cracks appeared in your army. 5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)