श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 99: अर्जुनके द्वारा तीव्र गतिसे कौरव-सेनामें प्रवेश, विन्द और अनुविन्दका वध तथा अद्भुत जलाशयका निर्माण  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  7.99.48 
तत्रान्तरिक्षे बाणानां प्रगाढानां विशाम्पते।
संघर्षेण महार्चिष्मान् पावक: समजायत॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! वहाँ अन्तरिक्ष में दृढ़तापूर्वक लगाए हुए बाणों के घर्षण से बड़ी-बड़ी लपटों वाली अग्नि प्रकट हुई॥48॥
 
O Prajanath! There, due to the friction of the arrows packed tightly in the space, a fire with huge flames appeared. ॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)