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श्लोक  7.99.44 
शस्त्राणि च विचित्राणि क्रुद्धास्तत्र व्यदर्शयन्।
छादयन्त: शरै: पार्थं मेघा इव दिवाकरम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
जैसे बादल सूर्य को ढक लेते हैं, उसी प्रकार क्रोधित कौरव सैनिक वहाँ विचित्र अस्त्र-शस्त्रों का प्रदर्शन करने लगे और कुन्तीपुत्र अर्जुन को बाणों से ढकने लगे।
 
Just as clouds cover the Sun, similarly the enraged Kaurava soldiers began displaying strange weapons there, covering Kunti's son Arjun with arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)