श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 99: अर्जुनके द्वारा तीव्र गतिसे कौरव-सेनामें प्रवेश, विन्द और अनुविन्दका वध तथा अद्भुत जलाशयका निर्माण  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.99.4 
रथमार्गप्रमाणं तु कौन्तेयो निशितै: शरै:।
चकार यत्र पन्थानं ययौ येन जनार्दन:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीपुत्र अर्जुन अपने तीखे बाणों से रथ के योग्य मार्ग बना देते थे, जिससे होकर श्रीकृष्ण अपना रथ लेकर आगे बढ़ते थे॥4॥
 
Kunti's son Arjuna used to create a path suitable for the chariot with his sharp arrows, through which Shri Krishna used to proceed ahead with his chariot.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)