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mahabharat 7.99.38: माधव! मैं इस समय जो अपना कर्तव्य समझता हूँ, वह तुमसे कह रहा हूँ। कृपया मेरी बात सुनो। घोड़ों को छोड़ दो और उनके शरीर से बाण निकाल दो, जिससे उन्हें शांति मिले।॥38॥   |   mahabharat अध्याय 7.99: अर्जुनके द्वारा तीव्र गतिसे कौरव-सेनामें प्रवेश, विन्द और अनुविन्दका वध तथा अद्भुत जलाशयका निर्माण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.99.38 
मम त्वनन्तरं कृत्यं यद् वै तत् त्वं निबोध मे।
हयान् विमुच्य हि सुखं विशल्यान् कुरु माधव॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
माधव! मैं इस समय जो अपना कर्तव्य समझता हूँ, वह तुमसे कह रहा हूँ। कृपया मेरी बात सुनो। घोड़ों को छोड़ दो और उनके शरीर से बाण निकाल दो, जिससे उन्हें शांति मिले।॥38॥
 
Madhava! I am telling you what I consider to be my duty at this time. Please listen to me. Release the horses and remove the arrows from their bodies to give them peace.'॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)