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mahabharat 7.99.23: यह देखकर पाण्डवपुत्र धनंजय अत्यन्त क्रोधित हो गया और दो बाण चलाकर उसने तुरन्त ही उनके धनुष को पुनः काट डाला।   |   mahabharat अध्याय 7.99: अर्जुनके द्वारा तीव्र गतिसे कौरव-सेनामें प्रवेश, विन्द और अनुविन्दका वध तथा अद्भुत जलाशयका निर्माण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 99: अर्जुनके द्वारा तीव्र गतिसे कौरव-सेनामें प्रवेश, विन्द और अनुविन्दका वध तथा अद्भुत जलाशयका निर्माण  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.99.23 
तयोस्तु भृशसंक्रुद्ध: शराभ्यां पाण्डुनन्दन:।
धनुषी चिच्छिदे तूर्णं भूय एव धनंजय:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
यह देखकर पाण्डवपुत्र धनंजय अत्यन्त क्रोधित हो गया और दो बाण चलाकर उसने तुरन्त ही उनके धनुष को पुनः काट डाला।
 
Seeing this, Pandava's son Dhananjaya became very angry and after shooting two arrows he immediately cut their bows again.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)