श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 99: अर्जुनके द्वारा तीव्र गतिसे कौरव-सेनामें प्रवेश, विन्द और अनुविन्दका वध तथा अद्भुत जलाशयका निर्माण  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.99.10 
तार्क्ष्यमारुतरंहोभिर्वाजिभि: साधुवाहिभि:।
तदागच्छद्‍धृषीकेश: कृत्स्नं विस्मापयन् जगत‍्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उस समय भगवान हृषीकेश अपने रथ का भार अच्छी तरह से वहन करने वाले गरुड़ और वायु के समान वेगवान घोड़ों के साथ सम्पूर्ण जगत को चकित करते हुए आगे बढ़ रहे थे॥10॥
 
At that time Lord Hrishikesha was advancing with the help of Garuda, who was able to bear the load of his chariot well, and horses as fast as the wind, astonishing the entire world.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)