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mahabharat 7.98.8: शत्रु नगरी को जीतने वाले वीर योद्धा सात्यकि ने द्रोणाचार्य को अपने ऊपर आक्रमण करते देख जोर से हँसकर अपने सारथि से कहा-॥8॥   |   mahabharat अध्याय 7.98: द्रोणाचार्य और सात्यकिका अद्भुत युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 98: द्रोणाचार्य और सात्यकिका अद्भुत युद्ध  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.98.8 
दृष्ट्वैवाभिपतन्तं तं शूर: परपुरंजय:।
उवाच सूतं शैनेय: प्रहसन् युद्धदुर्मद:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
शत्रु नगरी को जीतने वाले वीर योद्धा सात्यकि ने द्रोणाचार्य को अपने ऊपर आक्रमण करते देख जोर से हँसकर अपने सारथि से कहा-॥8॥
 
Satyaki, the valiant warrior who had conquered the enemy city, seeing Dronacharya attacking him, laughed loudly and said to his charioteer -॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)