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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 98: द्रोणाचार्य और सात्यकिका अद्भुत युद्ध  »  श्लोक 56-57h
 
 
श्लोक  7.98.56-57h 
ततो युद्धमभूद् राजंस्तेषां तव च धन्विनाम्॥ ५६॥
रजसा संवृते लोके शरजालसमावृते।
 
 
अनुवाद
हे राजन! तत्पश्चात् पाण्डवों और आपके धनुर्धरों में युद्ध छिड़ गया। उस समय सभी लोग धूल से ढँक गये थे और बाणों की वर्षा से आच्छादित हो गये थे।
 
O King! Thereafter a fight broke out between the Pandavas and your archers. At that time everyone was covered in dust and covered with a hail of arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)