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mahabharat 7.98.52-53h: जब तक वरुण और आग्नेय ये दोनों अस्त्र अपने बाणों में स्थित होकर एक-दूसरे के प्रभाव से प्रतिकर्षित नहीं हुए, तब तक भगवान सूर्य दक्षिण से पश्चिम की ओर आकाश में अस्त होने लगे। 52 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.98: द्रोणाचार्य और सात्यकिका अद्भुत युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 98: द्रोणाचार्य और सात्यकिका अद्भुत युद्ध  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  7.98.52-53h 
अस्त्रे ते वारुणाग्नेये ताभ्यां बाणसमाहिते॥ ५२॥
न यावदभ्यपद्येतां व्यावर्तदथ भास्कर:।
 
 
अनुवाद
जब तक वरुण और आग्नेय ये दोनों अस्त्र अपने बाणों में स्थित होकर एक-दूसरे के प्रभाव से प्रतिकर्षित नहीं हुए, तब तक भगवान सूर्य दक्षिण से पश्चिम की ओर आकाश में अस्त होने लगे। 52 1/2॥
 
Until the two weapons, Varun and Aagneya, got established in their arrows and were repulsed by each other's influence, Lord Surya started setting in the sky from the south to the west. 52 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)