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mahabharat 7.98.46-47h: सात्यकि ने अपने अस्त्र-शस्त्रों के जादू से अपने गुरु के अस्त्रों को नष्ट कर दिया और उन्हें तीखे बाणों से घायल कर दिया। यह एक अद्भुत घटना थी।   |   mahabharat अध्याय 7.98: द्रोणाचार्य और सात्यकिका अद्भुत युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 98: द्रोणाचार्य और सात्यकिका अद्भुत युद्ध  »  श्लोक 46-47h
 
 
श्लोक  7.98.46-47h 
तस्यास्त्राण्यस्त्रमायाभि: प्रतिहत्य स सात्यकि:॥ ४६॥
जघान निशितैर्बाणैस्तदद्भुतमिवाभवत्।
 
 
अनुवाद
सात्यकि ने अपने अस्त्र-शस्त्रों के जादू से अपने गुरु के अस्त्रों को नष्ट कर दिया और उन्हें तीखे बाणों से घायल कर दिया। यह एक अद्भुत घटना थी।
 
Satyaki, by the magic of his weapons, warded off the weapons of his teacher and wounded him with sharp arrows. It was a wonderful event.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)