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mahabharat 7.98.39-40h: इस प्रकार सुदृढ़ धनुष धारण करने वाले सात्यकि ने अपने गुरु के सौ धनुष काट डाले; परन्तु कोई यह भेद न देख सका कि गुरु कब धनुष पर निशाना साधते हैं और कब सात्यकि कब धनुष काट देते हैं।   |   mahabharat अध्याय 7.98: द्रोणाचार्य और सात्यकिका अद्भुत युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 98: द्रोणाचार्य और सात्यकिका अद्भुत युद्ध  »  श्लोक 39-40h
 
 
श्लोक  7.98.39-40h 
एवमेकशतं छिन्नं धनुषां दृढधन्विना॥ ३९॥
न चान्तरं तयोर्दृष्टं संधाने छेदनेऽपि च।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार सुदृढ़ धनुष धारण करने वाले सात्यकि ने अपने गुरु के सौ धनुष काट डाले; परन्तु कोई यह भेद न देख सका कि गुरु कब धनुष पर निशाना साधते हैं और कब सात्यकि कब धनुष काट देते हैं।
 
Thus Satyaki, who was holding a strong bow, cut off one hundred bows of his teacher; however, no one could see any difference between when he would aim the bow and when Satyaki would cut the bow. 39 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)