श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 98: द्रोणाचार्य और सात्यकिका अद्भुत युद्ध  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  7.98.37-38h 
निमेषान्तरमात्रेण भारद्वाजोऽपरं धनु:॥ ३७॥
सज्यं चकार तदपि चिच्छेदास्य च सात्यकि:।
 
 
अनुवाद
तब पलक झपकते ही भारद्वाज पुत्र द्रोण ने दूसरा धनुष हाथ में लेकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाई, किन्तु सात्यकि ने उस धनुष को भी काट डाला।
 
Then in the blink of an eye Drona, son of Bharadvaja, took another bow in his hand and strung it, but Satyaki cut that bow also.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)