श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 98: द्रोणाचार्य और सात्यकिका अद्भुत युद्ध  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  7.98.24-25h 
गर्जितोत्क्रुष्टसंनादा: शङ्खदुन्दुभिनि:स्वना:॥ २४॥
उपारमन् महाराज व्याजहार न कश्चन।
 
 
अनुवाद
महाराज! उस समय गर्जना, जयकार, दहाड़, शंख और नगाड़ों की ध्वनि बंद हो गई थी। कोई बोल भी नहीं रहा था।
 
Maharaj! At that time the roaring, shouting and roaring and the sound of conches and drums had stopped. No one was even talking.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)